ब्रम्हास्त्र की निर्माण विधि -
10 लीटर गोमूत्र, बेलपत्ती, आख, धतूरा, नीम एवं
सीताफल की पत्ती को एक एक पाव की मात्रा में मिट्टी के बर्तन में डुबाकर रखना है।
और इसे डेढ़ से दो लीटर के हिसाब से प्रति एकड़ इसका छिड़काव किया जा सकता है।
बीज जनित रोग - 5 किलो मीटर, 5 लीटर गोमूत्र, 50 ग्राम चूना
एवं 20 लीटर पानी ,बरगद पेड़ के नीचे की मिट्टी, इन सभी को
मिश्रित कर 24 घंटे के लिए रखना है। बीज बोने के एक दिन पहले छाया
में रखना है।
जीवामृत - 200 लीटर पानी, 10 किलो ताजा गोबर, 2 किलो गुड़ या बेसन, 1 किलो बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी में छायादार जगह में बनाना है, जूट के बोरे में ढंककर इसे घड़ी की दिशा में घुमाना है एवं 5 से 7 दिन रखना है। जीवामृत तैयार है।
प्रशिक्षण में आए कृषक गोकुल
साहू ने 5 लीटर गोमूत्र की खरीदी किया। उक्त प्रशिक्षण के दौरान
सारंगढ़ सीईओ अभिषेक बैनर्जी, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी जी.पी. गुप्ता, कृषि विभाग
के अन्य अधिकारीगण, ग्राम पंचायत के सदस्य, गौठान समिति और स्वयं सहायता
समूह के सदस्य उपस्थित रहे।

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