Friday, December 30, 2022

कलेक्टर डाॅ. फरिहा आलम सिद्दकी जी ने ली शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक

सभी स्कूल पूरी प्रतिबध्दता के साथ बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की दिशा पर काम करें- कलेक्टर

 

सारंगढ़-बिलाईगढ़, 02 दिसंबर 2022/ कलेक्टर डाॅ. फरिहा आलम सिद्दकी ने आज सारंगढ़ के स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में कलेक्टर ने शिक्षा की गुणवत्ता को और अधिक बेहतर करने के लिए अनेक विषयों पर बात की। कलेक्टर ने हाल ही में जिले में स्कूलों की एक रिपोर्ट बनवाई थी, उक्त रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि जिले के 108 स्कूलों में जिले के तीन ब्लाॅक में से हर ब्लाॅक के दो या तीन स्कूल ऐसे हैं जिनका रिजल्ट शत प्रतिशत है, लगभग पांच-छःह स्कूल ऐसे हैं जहाँ 90 प्रतिशत बच्चे पास होते हैं और इसके अलावा बहुत से स्कूल ऐसे हैं जहाँ का रिजल्ट 70 प्रतिशत से भी कम है। कुछ ऐसे भी स्कूल हैं जहाँ का रिजल्ट 30 प्रतिशत से भी कम है। सारंगढ़ ब्लाॅक के 32 स्कूल में से 5 स्कूल ऐसे हैं जिनमें बच्चों का रिजल्ट 30 प्रतिशत से नीचे है जो कि बहुत ही निराशाजनक है। कलेक्टर ने शिक्षा विभाग के सभी लोगों को कहा कि इसमें पुनर्विचार करने की आवश्यकता है, यह आज के समय में घोर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्कूलों में कोई माता-पिता अपने बच्चे को नहीं भेजना चाहेगा, यह संबंधित स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वह इसमें सुधार करे। जो संस्थान हमारा जीविकोपार्जन करती है वहां हम 30-40 प्रतिशत मात्र दे रहे हैं, हमें इसके लिए आत्मग्लानि होनी चाहिए। समाज के जिस वर्ग के बच्चों के लिए आप काम करते हैं, वही हमारे समाज का आईना है, भविष्य के वे नीति नियंता हैं। आखिर हम उन बच्चों को क्या दे रहे हैं। आपके स्कूल का कोई भी छात्र परीक्षा में अच्छे परिणाम लाता है, तो यह शिक्षक के लिए एक गर्व का विषय होता है। आप सभी अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाएं और एक शिक्षक का जो काम होता है शिक्षा देना, आप सिर्फ वही काम पूरी मेहनत और लगन से करें और सभी यह लक्ष्य रखें कि आपके स्कूल के बच्चों का परीक्षा परिणाम 90 प्रतिशत से अधिक रहे। स्कूल के सभी बच्चों को अपने बच्चे की तरह जिम्मेदारी समझें, उन बच्चों में भी कुछ बच्चे ऐसे हो सकते हैं जिनकी पढ़ने में कोई विशेष रूचि नहीं होती है लेकिन 90 प्रतिशत बच्चे ऐसे होते हैं जो पढ़ना चाहते हैं, हमें उन‌ सभी बच्चों की बेहतरी के लिए अपना काम पूरी जिम्मेदारी के साथ करना होगा। आगे उन्होंने कहा कि हम जिस समाज में रहते हैं वहाँ एक बच्चे के लिए एक बेहतर जीवनशैली के साथ आगे बढ़ने का एक ही विकल्प है बेहतर शिक्षा। अगर उसको बेहतर शिक्षा नहीं मिलेगी, तो वह न सेना में जा पाएगा, न ही खेलकूद में आगे बढ़ पाएगा, न ही कला संगीत सीख पाएगा, न ही व्यापार करने लायक रहेगा, ‌न ही कोई और किसी तरह की पढ़ाई कर पाएगा। हम सभी अपने बच्चों के लिए यह चाहते हैं कि उन्हें बेहतर शिक्षा नसीब हो, यही भाव हमें अपने उन स्कूल के बच्चों के लिए भी रखना होगा जहाँ हम शिक्षा देते हैं तब कहीं जाकर स्कूल का और इस जिले के बच्चों के परीक्षा परिणाम में सुधार होगा। कलेक्टर ने जिले का औसत प्रतिशत जो 55 प्रतिशत के आसपास है उस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि आने वाले तीन महीनों में आप अपने स्कूल का सिलेबस तय समय पर पूरा करेंगे और पढ़ाई पूरे अनुशासन के साथ करवाएंगे और इसका परिणाम आने वाले 10वीं और 12वीं बोर्ड के परीक्षा परिणाम में दिखना चाहिए। कलेक्टर ने कहा कि शिक्षा का क्षेत्र उनके लिए विशेष रूचि का क्षेत्र है और इसलिए वह स्वयं लगातार जिले की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक बेहतर करने के लिए स्कूलों में जाकर सतत मानीटरिंग करेंगी और बेहतरी के लिए जो भी अपने स्तर पर आवश्यक प्रयास होंगे उस पर कार्य करेंगी। उक्त बैठक में अपर कलेक्टर निष्ठा पाण्डे तिवारी, जिला शिक्षा अधिकारी डेजी रानी जांगड़े, सहायक संचालक रामेश्वर प्रसाद जांगड़े एवं मुकेश कुर्रे, साथ ही जिले के समस्त प्राचार्य एवं शिक्षा विभाग के समस्त पदाधिकारीगण उपस्थित रहे।






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